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Tuesday, 25 August 2026

फिल्म "आरसी" (Arsi)! ------ Manjesh Boora'




🎞️ ऐसी फिल्म... जिसकी आधी शूटिंग लाहौर के दंगों में जल गई, और आधी मुंबई में पूरी हुई! 💔🔥

आज बात करेंगे सन 1947 की एक ऐसी ऐतिहासिक और अनोखी फिल्म की, जिसकी रील पर भारत के विभाजन (Partition) के घाव हमेशा के लिए छप गए— फिल्म "आरसी" (Arsi)!

तस्वीर में नजर आ रही यह खूबसूरत जोड़ी अभिनेता अल-नासिर (Al-Nasir) और सदाबहार अभिनेत्री मीना शोरी (Meena Shorey) की है, जो इस फिल्म के मुख्य कलाकार थे। लेकिन इस फिल्म के पीछे का असली इतिहास आपके रोंगटे खड़े कर देगा:

🏢 जब दंगों की आग में जल उठा 'लाहौर स्टूडियो' 

🎬इस फिल्म की शुरुआत अविभाजित भारत के सांस्कृतिक केंद्र लाहौर में हुई थी। लेकिन 1947 में विभाजन की घोषणा होते ही लाहौर सांप्रदायिक दंगों की आग में झुलस उठा। उस दौर के ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स बताते हैं कि दंगों के दौरान लाहौर के दो सबसे बड़े फिल्म स्टूडियो— 'शोरी पिक्चर्स स्टूडियो' (Shorey Pictures) और 'पंचोली आर्ट पिक्चर्स स्टूडियो' (Pancholi Art Pictures) को उपद्रवियों ने पूरी तरह जलाकर खाक कर दिया था!

🚂 आधी फिल्म लाहौर में... आधी मुंबई में! 

🎥स्टूडियो के तबाह हो जाने और चारों तरफ फैली हिंसा के कारण फिल्म की शूटिंग बीच में ही ठप हो गई। अपनी जान बचाकर फिल्म के निर्देशक दाऊद चांद मीना शोरी और अल-नासिर समेत पूरी यूनिट लाहौर छोड़कर मुंबई (तब बॉम्बे) आ गई। फिल्म का आधा हिस्सा लाहौर में शूट हो चुका था, जबकि बची हुई आधी अधूरी शूटिंग को मुंबई के स्टूडियोज में आनन-फानन में पूरा किया गया।

💔 बंटवारे के बाद लाहौर में हुई रिलीजदिलचस्प बात यह है कि मुंबई में पूरी होने के बाद, विभाजन के तुरंत बाद ही इस फिल्म को वापस सरहद पार लाहौर के कैसर सिनेमा में रिलीज किया गया था, जहाँ यह बेहद कामयाब रही। यह फिल्म इस बात का गवाह है कि कला को सरहदें और दंगे भी नहीं रोक सकते।

🎼 फिल्म "आरसी" (1947) के संगीतकार और गीतकार:संगीत निर्देशक: इस फिल्म का जादुई संगीत दो संगीतकारों ने मिलकर तैयार किया था— श्याम सुंदर और लच्छीराम तोमर।

 (संगीतकार श्याम सुंदर वही हैं जिन्होंने आगे चलकर हिंदी सिनेमा को महान गायक मोहम्मद रफ़ी साहब जैसा हीरा दिया था)।

गीतकार : इस फिल्म के सभी भावुक और सुंदर गीतों के बोल मशहूर गीतकार सरशार सैलानी  ने लिखे थे।

🎵 फिल्म के सबसे बढ़िया और सुपरहिट गाने :



बंटवारे के दर्द और जुदाई के उस दौर में इस फिल्म के गाने लोगों के दिलों को छू गए थे। इस फिल्म के 3 सबसे बेहतरीन और प्रसिद्ध गाने इस प्रकार हैं:

1. तेरे बिना बालम जिया मोरा डोले 🌸 (सबसे बड़ा सुपरहिट)


गायिका: ज़ीनत बेगम ।

खास बात: यह इस फिल्म का सबसे लोकप्रिय और मधुर गाना माना जाता है। ज़ीनत बेगम की सुरीली आवाज़ और श्याम सुंदर की धुन ने इसे उस दौर का एक बड़ा चार्टबस्टर बना दिया था। जुदाई के दर्द को बयां करता यह गीत आज भी पुराने गानों के शौकीनों का पसंदीदा है।

2. आशियाना अपना लुटा अपनी नज़र के सामने 💔 (बेहद भावुक गीत।

गायक: एस. डी. बातिश 

खास बात: यह गाना फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) है। विडंबना देखिए, इस गाने के बोल थे— "आशियाना अपना लुटा अपनी नज़र के सामने...", और ठीक इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान लाहौर में दंगे भड़क उठे और कलाकारों का असली आशियाना (लाहौर स्टूडियो) सचमुच जलकर खाक हो गया! जब यह गाना थिएटर्स में बजा, तो लोग फूट-फूट कर रो पड़े थे।

3. दुनिया छूटे पर ना छूटे तेरी महफ़िल 🤝 

(शानदार युगल गीत)

गायक: एस. डी. बातिश और ज़ीनत बेगम ।

खास बात: यह अल-नासिर और मीना शोरी पर फिल्माया गया एक खूबसूरत और धीमा रोमांटिक गाना है। कठिन परिस्थितियों में भी एक-दूसरे का साथ न छोड़ने का वादा करता यह गीत संगीत के शौकीनों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ।

⏳ साथियों, बस थोड़ा सा इंतज़ार और...! 👇आज शाम ठीक 5:00 बजे 'आरसी' फिल्म के एक बेहद ख़ास रील "तेरे बिना बालम जिया मोरा डोले"🎻 आपके लिए आने वाली है! सभी साथी 5:00 बजे का इंतज़ार ज़रूर करें और पोस्ट में यह जानकारी कमेंट बॉक्स में बताएं कि आपको इतिहास का यह पन्ना कैसा लगा! 📻

Sunday, 25 December 2016

फिल्म अभिनेत्रा साधना एक स्मरण ------ संजोग वाल्टर / ध्रुव गुप्त







मुंबई (25 दिसंबर):वयोवृद्ध फिल्म अभिनेत्रा साधना का निधन हो गया है। वे 74 साल की थीं। उन्होंने मुंबई में अंतिम सांसें लीं। साधना के निधन की खबर के पूरे बॉलीवुड में शोक की लहर दौड़ गई है। एक्टर्स ने उनकी मृत्यु पर गहरा दुख व्यक्कत किया है।


साधना का जन्म 2 सितम्बर, 1941 को कराची के सिन्ध में हुआ था। साधना अपने माता-पिता की एकमात्र संतान थीं और 1947 मे देश के बंटवारे के बाद उनका परिवार कराची छोड़कर मुंबई आ गया था।
साधना का नाम उनके पिता मे अपनी पसंदीदा अभिनेत्री साधना बोस के नाम पर रखा था। उनकी मां ने उन्हें आठ वर्ष की उम्र तक घर पर ही पढा़या था। बता दें कि हरि शिवदासानी जो अभिनेत्री बबीता के पिता हैं, साधना के पिता के भाई हैं।
साधना ने 1981 में महफ़िल से बॉलीवुड में करियर की शुरूआत की और पहली बार 1974 में गीता मेरा नाम का निर्देशन भी किया। अपने दौर में साधना का हेयर स्टाइल भी खासा फेमस था।



http://hindi.news24online.com/veteran-actor-sadhana-passes-away-29/
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मशहूर अभिनेत्री साधना का मुंबई के हिंदुजा हॉस्पिटल में शुक्रवार को निधन हो गया. 74 साल की साधना कुछ दिनों से बीमार चल रही थीं.
उन्होंने 'आरज़ू', 'मेरे मेहबूब', 'लव इन शिमला', 'मेरा साया', 'वक़्त', 'आप आए बहार आई', 'वो कौन थी', 'राजकुमार', 'असली नकली', 'हम दोनों' जैसी कई मशहूर हिंदी फ़िल्मों में काम किया था.
साधना का पूरा नाम साधना शिवदासानी था. उनके नाम पर 'साधना कट' हेयरस्टाइल बेहद मशहूर हुआ था.
ट्विटर पर कई लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं.
 
 
पिछले साल साधना, अभिनेता रणबीर कपूर के साथ रैंप पर भी दिखी थीं
निर्माता-निर्देशक करण जौहर ने ट्वीट किया, "आरआईपी साधना आंटी...सौंदर्य, आत्मविश्वास और आकर्षण की आपकी विरासत अमर रहेगी."
पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने ट्वीट किया, "साधना पहली ऐसी अभिनेत्री हैं, जिनके नाम पर एक हेयरस्टाइल शुरू हुआ. उनका 'साया' हमेशा ज़िंदा रहेगा."
गायिका लता मंगेशकर ने ट्विटर के ज़रिए कहा, ''मुझे अभी पता चला कि मेरी पसंदीदा अभिनेत्री साधना जी का आज स्वर्गवास हुआ है. वो एक बहुत बड़ी कलाकार थी. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे.''
साधना के साथ फ़िल्म 'एक फूल दो माली' और 'इंतकाम' में काम कर चुके अभिनेता संजय ख़ान कहते हैं, ''मैंने उनके साथ अपनी दो सबसे कामयाब फ़िल्में की थीं. वो बेहद ख़ूबसूरत थीं. बहुत सुंदर तरीके से चलती थीं. उन्हें हेयर स्टाइलिंग की इतनी समझ थी की एक बार उन्होनें मुझे एक नया हेयर स्टाइल दिया था.''
उन्होंने कहा, ''साधना के पति आरके नैय्यर मेरे करीबी मित्र थे. मुझे याद है कि साधना जितनी ख़ूबसूरत थी उतनी ही साफ़ दिल की थीं.''
संजय ख़ान ने कहा, ''मैं उनसे मिलने नहीं गया क्योंकि मुझे मालूम था कि वो ठीक नहीं हैं. उन्हें दावत देने की मेरी ख़्वाहिश अधूरी रह गई. मैं उन्हें बीमार नहीं देखना चाहता था. बहुत दुख है.''
अभिनेत्री आशा पारेख के मुताबिक़, ''पिछले हफ़्ते ही हम मिले थे और हमारी पार्टियां होती थीं, जिनमें हम बीते ज़माने की एक्ट्रेसेज़– हेलेन, वहीदा रहमान, शम्मी आंटी और कई लोग मिलते थे. उनकी तबियत पहले से ख़राब थी और पांच-छह कोर्ट केस भी चल रहे थे, जिनके चलते वह परेशान थीं. उन्होंने कभी अपना दुख हमसे साझा नहीं किया.''
आशा पारेख कहती हैं, ''वह बहुत पॉपुलर थीं और उसका 'साधना कट' मुझे आज भी याद है. हम उनके घर ही जा रहे हैं.''
पिछले साल मुँह के कैंसर की वजह से साधना की सर्जरी हुई थी. पिछले साल वह अभिनेता रणबीर कपूर के साथ रैंप पर भी दिखी थीं.